लुप्त हो रहे हैं ये खूबसूरत पर्यटन स्थल

भारत-चीन सीमा विवाद में लुप्त हो रहे हैं ये खूबसूरत पर्यटन स्थल –

नेलांग घाटी

उत्तराखंड के सीमावर्ती जिले उत्तरकाशी के हर्षिल सब-डिवीज़न में छिपे हुए, ऐतिहासिक रूप से प्रसिद्ध भारत-चीन सीमा पर यह खूबसूरत घाटी समुद्र तल से 11,000 फीट की ऊंचाई पर है। नेलांग घाटी जाध गंगा के उत्तर-पूर्व में स्थित, दो सुनसान गांवों के बीच की जगह है, जिसका अर्थ है – नीले पत्थरों की जगह। यह घाटी चीन और तिब्बत से भारत का व्यापर मार्ग था। अब यह भारत और चीन के लिए विवाद का मुद्दा है। नेलांग घाटी को भारत द्वारा नियंत्रित किया जा रहा है। लेकिन चीन इसका दवा करता है।

डेमचोक

डेमचोक

डेमचोक LAC से करीब एक गांव है, जो कभी लद्दाख से तिब्बत जाने के रास्ते को जोड़ता था। यह जम्मू और कश्मीर के लेह जिले में स्थित है। यहां से करीब 300 किमी की दूरी पर, कैलाश मानसरोवर स्थित है। डेमचोक का मार्ग मैदानी इलाकों के माध्यम से एक रेगिस्तानी क्षेत्र की और जाता है, जहाँ जहाँ भारतीय सेना के शिविर हैं। पहाड़ियों ने इस क्षेत्र को चारो ओर से घेरा हुआ है, जो इसे प्राकृतिक रूप से ओर भी सुन्दर बनता है। जो आपकी यात्रा को निश्चित रूप से जीवंत और रोमांचित करता है। सर्दियों में तापमान भारी बर्फबारी के कारण लगभग -30ºC तक गिरता है। चीन इसका क्षेत्र पर अपना दवा करता है।

अक्साई चिन

अक्साई चिन

अक्साई चिन, जम्मू और कश्मीर राज्य के लद्दाख क्षेत्र का हिस्सा है, जो चीन के नियंत्रण में है। जहां तक पर्यटन का संबंध है, सुरक्षा कारणों से इस क्षेत्र में प्रवेश प्रतिबंधित है। आस-पास के क्षेत्र की तरह, यह जगह प्राकृतिक सुंदरता में समृद्ध है। यह एक रेगिस्तानी क्षेत्र है जिसमें काफी खारे पानी की सुन्दर झीलें है। यहाँ स्पष्ट नीले पानी की प्रसिद्द पांगोंग झील स्थित है जो इस स्थान को स्वर्ग की तरह सुंदर एवं निर्मल बनती है। यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक पर्यटक के रूप में यहाँ आसानी से दौरा नहीं किया जा सकता है। अगर भारत इस जमीन के अधिकारों का दावा करने में सक्षम होता है, तो बेहतर पर्यटन विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं।

मुर्गो

मुर्गो

मुर्गो लेह, लद्दाख और अक्साई चिन की सीमा पर एक छोटा सा गाँव है, जहाँ आसपास कई सुन्दर पहाड़ियाँ हैं। “मुर्गो” शब्द का अर्थ यरकंडी उईघुर में “मृत्यु का दरवाजा” है। यहाँ बर्फीली हवाएँ चलती हैं जिससे सर्दियों में यहाँ का तापमान -50ºC तक गिर जाता है। यहाँ बहुत ही कम लोग रहते हैं। जिनकी आय का मुख्य स्रोत खूबानी खेती और याक पालन है। बर्फ में छिपी पहाड़ियाँ इस जगह को प्राकृतिक रूप से सुन्दर बनती हैं। यह भारत ओर चीन के कब्जे वाले कश्मीर का हिस्सा है।

शिपकी-ला

शिपकी-ला

शिपकी-ला हिमाचल के किन्नौर जिले में भारत-तिब्बत सीमा पर एक पर्वत पास है, जिसमें सतलुज नदी बहती है। यह प्राचीन सिल्क रोड की एक शाखा है, राष्ट्रीय राजमार्ग 5 सबसे सुरक्षित मार्ग है जो शिपकी-ला की ओर जाता है। जो भारत का सबसे ऊँचा राष्ट्रीय राजमार्ग है। यह जगह प्राकृतिक रूप से बहुत सुन्दर जगह है। जिसमें बर्फ से ढकी सुन्दर पहाड़ियों से होकर रास्ते जाते है, जो फोटोग्राफी के लिए मोटर साइकिल चालकों को आकर्षित करते हैं। यह पूरी तरह से शहर की हलचल से दूर है और एक सप्ताहांत में भ्रमण के लिए आदर्श है। हालांकि, इस क्षेत्र में गैर-निवासियों के लिए प्रवेश की अनुमति नहीं है। अगर शिपकी-ला जाने का मौका मिले तो यह बहुत ही उत्साहवर्धक पर्यटन स्थल है।

शक्स्गम घाटी

शक्स्गम घाटी

शक्स्गम घाटी काराकोरम श्रृंखला में छिपा बेहद ही सुन्दर भाग है। जिसमें काफी सारे बड़े-छोटे ग्लेशियर पहाड़ी की ढलानों से गिरते हुए इसे अत्यंत आकर्षक बनाते हैं। इनमें इंस्काती ग्लेशियर सबसे बड़ा है। यह जगह एक तरीके का ग्लेशियरों का वंडरलैंड है। शक्स्गम घाटी चारो ओर से ऊँचे बर्फीले पहाड़ों से घिरा हुआ है, जिनमें से दुनिया की दूसरी सबसे ऊँची चोटी K2 भी है। इसी वजह से यहाँ कोई नहीं रहता लेकिन एक साहसिक यात्रा के लिए यह आदर्श जगह है। शक्स्गम नदी इस क्षेत्र में बहती है जो इसे ओर भी सुन्दर बनती है।

यह एक उच्च विवादित क्षेत्र है, यह स्थान किसके पास होना चाहिए इसके लिए पाकिस्तान, चीन और भारत के बीच वार्ताएँ चल रही हैं। वर्तमान में, इस क्षेत्र पर चीन का कब्ज़ा है।

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