सीमाओं से …

खेत की बाड़ लांघ कर कोई पशु भी यदि भीतर आ जाए तो ऐसी युद्ध की सी परिस्थिति उतपन्न हो जाती है मानो किसी अश्वमेघ के घोड़े ने सीमाओं का उलंघन कर दिया हो। पडौसी की बाड़ पर भी यदि ध्यान दिया होता तो बात यहाँ तक नहीं पहुँचती। अश्व यहाँ तक नहीं आता। ऐसा ही कुछ भारत आज कर रहा है। ‘डोकलाम’ भूटान के उत्तर में स्थित एक पठार है जिस पर चीन अपना आधिपत्य जमाना चाहता है। भारत चीन को यदि ऐसा करने से रोक पाता है तो भविष्य में स्थितियों को गंभीर होने से बचाया जा सकेगा।

मित्र कठिन परिश्रम से बनाए जाते हैं। नेपाल, भूटान, म्यान्मार, बांग्लादेश एवं श्री लंका – ये सभी राष्ट्र आज भारत के साथ खड़े हैं। इसके पीछे किया गया परिश्रम किसी से छुपा नहीं है। ये तो सौभाग्य ही होगा यदि हमारे चारों और मित्र राष्ट्र हों। परन्तु परिस्थितियाँ चहुँओर एक सी नहीं है। आज भी पाकिस्तान किसी न किसी प्राकर से भारत को क्षति पहुँचाने का प्रयास करता रहता है। परन्तु जैसा कि भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई जी ने कहा है – ‘हम मित्र तो बदल सकते हैं पड़ौसी नहीं’। बहुत से प्रयासों के बाद भी आज पाकिस्तान शान्ति से रहने को तैयार नहीं। कभी-कभी तरस आता है पाकिस्तान के नागरिकों पर। कर चुकाते हैं वे और उसका सही गलत करना सब सेना के हाथ। परन्तु ये उन नागरिकों के सोचने का ही विषय है।

1962 के युद्ध में जब चीन की सेना अरुणाचल में प्रवेश कर गई थी तब नागरिकों ने राष्ट्रभक्ति का शौर्यपूर्ण परिचय दिया। चीन के सैनिक उपहारों के साथ वहाँ आए और जनता में बांटे। उन्हें लगा था सरलता से वे अरुणाचल को पा सकेंगे। परन्तु चीन की अपेक्षाओं के विपरीत नागरिकों ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस प्रकार के अनेकों राष्ट्रप्रेम से जुड़े प्रसंग हम सभी को आश्वस्त करते हैं। 1967 का नाथू-ला चो-ला में चीन से हुआ युद्ध कम ही लोग जानते हैं। इस लड़ाई में चीन की सैना परास्त हुई। 1975 तक सिक्किम एक अलग देश था। जनसामान्य का सदा से ही भारतीय संस्कृति में दृढ़ विश्वास था। और वे भारत में सम्मिलित हुए। आवश्यकता है इन सभी जानकारियों को जनसाधारण तक पहुँचाने की।

हमारे पूर्वजों के बलिदान एवं प्रयास ही हमें सुरक्षित सीमाएँ दे पाए। हमारा दायित्व है कि हम इसकी रक्षा करें और इसे आने वाली पीढ़ी को एक मज़बूत स्थिति में देकर जाएँ। यह कार्य सही दिशा में बढ़ सके इसी ध्येय को लेकर सीमा जागरण मंच यह पत्रिका लेकर आया है। भारत की सीमाओं से संबंधित जानकारियाँ जन-जन तक पहुँचे। सीमाओं से जुड़े संवाद एवं सामान्य ज्ञान। चौबीस राज्य जो सीमाओं से लगते हैं – वहाँ के निवासियों की समस्याएं, वहाँ के उत्सव, वहाँ के पर्यटक स्थल इत्यादि। अन्य राज्यों की भूमिका क्या होनी चाहिए।

भूलना नहीं चाहिए कि भारत के इतिहास ने व्यक्तिगत स्वार्थों के चलते सीमाओं को सिकुड़ते देखा है। कैसे हमने अपनी विरासत खोई? पश्चिम में हिंगलज माता, हड़प्पा मोहनजदड़ो अब पाकिस्तान में हैं। उत्तर में अक्साइ चिन एवं मीर मुजफ्फराबाद, गिलगत-बालटिस्तान के लिए संघर्ष आज भी जारी है। ऐसी परिस्थिति दुबारा न आए इसके लिए चौकन्ना रहने की आवश्यक्ता है। जन-जन को जागृत रहने की आवश्यकता है।

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