कुशोक बकुला रिंपोछे – एक दूरदर्शी संत

उन्नीसवें कुशोक बकुला

उन्नीसवें कुशोग बकुला का जन्म 21 मई 1917 को हुआ था। 2017 में जन्म शताब्दी वर्ष मनाया गया। देश में विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम हुए। देश की राजधानी दिल्ली में भी कुशोक बकुला रिम्पोचे के जीवन पर आधारित एक छायाचित्र प्रदर्शनी ‘लामा से स्टेट्समैन’ का आयोजन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र में गत वर्ष (2017 में) 20 दिसम्बर से 31 दिसम्बर के बीच किया गया। इस समारोह का केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने उद्घाटन किया।

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कार्यक्रम का उदघाटन दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। उदघाटन समारोह में उपस्धित विशिष्ट अतिथि थे –

  • श्री किरन रिजिजू – गृह राज्य मंत्री, भारत सरकार
  • श्री गोंचिग गम्बोल्ड – मंगोलिया के राजदूत एवं कार्यक्रम के विशिष्ट अथिति
  • श्री अरुण कुमार – जम्मू कश्मीर मामलों के विशेषज्ञ
  • माननीय लामा लोबजंग – अशोक मिशन
  • श्री तेनपा शेरिंग – माननीय दलाई लामा के प्रतिनिधी
  • श्री थुप्सतान छेवांग – लद्दाख के सांसद
  • श्री राम बहादुर राय – अध्यक्ष, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र
  • डॉ सच्चिदानंद जोशी – सदस्य सचिव, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र
  • डॉ राधा बेनर्जी सरकार – पूर्वी एशिया कार्यक्रम के मुखिया, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र

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सोनम वांगचुक, जो 25 वर्षों तक बकुला के साथ रहे हैं, उन्होंने उनके 50 साल लम्बे राजनीतिक सफर पर प्रकाश डालते हुए बताया, ‘बकुला राजनीति से ऊपर उठे व्यक्ति थे और वह हर विचारधारा के लोगों के साथ सामान व्यवहार रखते थे।’ वह बकुला ही थे जिनके मंगोलिया में भारत के राजदूत बन कर जाने पर, 70 साल के कम्युनिस्ट शासन के बाद, वहां बौद्ध धर्म को नया जीवन मिला।

जम्मू कश्मीर विशेषज्ञ अरुण कुमार ने मात्र 20 दिनों की तैयारी से प्रदर्शनी के बेहतरीन आयोजन पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र को बधाई दी। उन्होंने कहा, ‘हमें बकुला के जीवन की महत्ता को देखने के साथ-साथ यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जिस समयकाल में वह जिन स्थानों पर कार्यरत थे, वहां पहुंचना अत्यंत कठिन था’। उन्होंने कहा कि रिंपौछे धार्मिक गुरु और महान समाज सुधारक भी थे।

विशिष्ट अथिति मंगोलिया के राजदूत गोंचिग गम्बोल्ड ने बकुला के व्यवहार की सरहना करते हुए कहा, ‘वह एक संवेदनशील इंसान थे और सभी मिलने आने वालों के लिए वक्त निकालते और उनसे मिलते थे। मंगोलिया में बौद्ध धर्म के लिए उनके द्वारा शुरू किये गए सभी कार्य आज भी सुचारू रूप से चल रहे हैं।’

किरेन रिजिजू ने उद्घाटन समारोह में कहा कि भन्ते बकुला रिंपोछे सक्रिय भिक्षु थे उन्होंने शांति के लिए कार्य किया और विश्व के विभिन्न भागों में भगवान बुद्ध की शिक्षा का प्रसार किया। भन्ते रिंपोछे विश्व शांति पर्यावरण संरक्षण तथा अंतर-मत संवाद के लिए काम करने वाले अनेक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से जुड़े रहे।

रिजिजू ने कहा कि अधिनायकवादी साम्यवादी शासनों द्वारा बौद्धिक स्वतंत्रता से वंचित किए गए विभिन्न देशों के लोगों में धर्म की ज्योति जलाने में भन्ते रिंपोछे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मंगोलिया, रूस तथा चीन सहित अनेक देशों में बौद्ध मत को पुनर्जीवित करने के उनके कार्यों से साबित होता है कि भन्ते बकुला रिंपोछे महान विभूति थे।

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रिनपोचे के कार्यों का स्मरण करते हुए सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र इस प्रदर्शनी के माध्यम से रिनपोचे के कार्यों के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करता है। हम पूरे देश में उनके कार्यों को प्रदर्शनी के माध्यम से जनता तक ले जाने की योजना बना रहे हैं।

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