‘आयुष्मान भारत’ से मिलेगा 40 प्रतिशत जनता को मुफ्त इलाज

आयुष्मान भारत’ योजना के तहत देश की 40  प्रतिशत जनता को मुफ्त इलाज मिलेगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा मिशन के तहत ‘आयुष्मान भारत’ योजना को शुरू करने के लिए हिमाचल समेत चार राज्यों ने केंद्र सरकार के साथ एमओयू साइन किया

शिमला में आयोजित कार्यशाला में यह करार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के सामने हिमाचल के अलावा उत्तराखंड, हरियाणा, जम्मू एवं कश्मीर और केन्द्र शासित चंडीगढ़ ने किया। पंजाब ने फिलहाल करार से इनकार कर दिया है।

पंजाब का कहना है कि केंद्र से अभी कई मुद्दों पर बात होनी है। इस योजना के शुरू होने के बाद हिमाचल में पंद्रह लाख से भी अधिक लोगों को पाँच लाख तक मुफ्त इलाज की सुविधा मिल सकेगी।

याोजना में 1352 तरह के उपचार शामिल होंगे

इस योजना का लाभ देश की 40 फीसदी जनता को मिलना है। मरीजों के लिए यह योजना पेपरलेस, कैशलेस होगी। इसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के सभी लाभ भी देय होंगे और 1352 तरह के उपचार शामिल होंगे।

इसका 60 फीसदी खर्च केंद्र और 40 फीसदी राज्य सरकारों को उठाना है। योजना को लागू करने से पहले देश भर में इस तरह की पाँच कार्यशालाएं होंगी। योजना से देशभर के 10 करोड़ परिवार लाभान्वित होंगे।

यह दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना : नड्डा

कार्यशाला के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि ‘आयुष्मान भारत’ विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना है। इससे देशभर में स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति आएगी। इसकी समूची आईटी प्रणाली जून महीने तक तैयार होगी। जुलाई माह में इस योजना को टेस्ट पर डाला जाएगा।  ‘

आयुष्मान भारत’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच है। नड्डा ने कहा कि देश भर के लोगों को उनके घरों के नजदीक बेहतर स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएँ उपलब्ध करवाने के लिए देशभर में 20 एम्स खोले जा रहे हैं। देश भर के 1.50 लाख स्वास्थ्य उप केंद्रों को बीमारियों की शीघ्र पहचान के लिए वैलनेस केंद्रों में बदला जाएगा।

कार्यशाला छोड़कर चले गए पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री

पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री बह्म मोहिंद्रा पीटरहॉफ शिमला में आयोजित कार्यशाला को बीच में छोड़कर ही चले गए। एम॰ओ॰यू॰ साइन न करने पर उन्होंने कहा कि अभी कई मुद्दों पर केंद्र सरकार से पहले बात की जानी है, तभी हस्ताक्षर होंगे।

सोमवार को कंपीटेट अधिकारी साथ नहीं होना भी उन्होंने करार पर हस्ताक्षर न कर पाने का कारण बताया।  उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पी॰एस॰ रावत, पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बह्म मोहिंद्रा, हिमाचल के स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार, केंद्रीय

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव प्रीति सुडान, नीति आयोग स्वास्थ्य के सदस्य डॉ. वी॰के॰ पॉल, राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. इंदुभूषण, प्रधान सचिव स्वास्थ्य प्रबोध सक्सेना आदि ने भी अपने विचार रखे।

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