चीन ने दक्षिण चीन सागर के द्वीप पर पहली बार उतारे लड़ाकू विमान, अमरीका ने कहा – इससे तनाव बढ़ेगा

चीन की एयरफोर्स ने हाल ही में पुष्टि की थी कि उसने दक्षिण चीन सागर के द्वीप पर एच-6के समेत लड़ाकू विमान उतारे थे।

  • दक्षिण चीन सागर का करीब 35 लाख स्क्वेयर किमी एरिया विवादित
  • इस समुद्र से हर साल 5 लाख करोड़ यूएस डॉलर से ज्यादा का व्यापार होता है

बीजिंग। चीन ने पहली बार दक्षिण चीन सागर के विवादित द्वीप पर लड़ाकू विमान उतारे। इस पर अमेरिका ने कि चीन के इस काम से तनाव बढ़ेगा और क्षेत्र में अस्थिरता आएगी। दक्षिण चीन सागर को लेकर अमेरिका-चीन के संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। चीन कह चुका है कि इस मामले पर अमेरिका किसी तरह की दखलअंदाजी न करे।

चीन ने द्वीप पर उतारे एच-6के बॉम्बर्स

  • चीन की एयरफोर्स ने हाल ही में पुष्टि की थी कि उसने दक्षिण चीन सागर के द्वीप पर एच-6के समेत लड़ाकू विमान उतारे थे।
  • चीनी आर्मी के हवाले से हांगकांग के साउथ चाइना पोस्ट ने बताया कि इस ट्रेनिंग से एयरफोर्स ने देश ने कहीं भी नियत समय में लड़ाकू विमान उतारने की योग्यता हासिल कर ली है।
  • मिलिट्री एक्सपर्ट वांग मिनलियांग ने बताया कि बॉम्बर्स की लैंडिंग और टेकऑफ ट्रेनिंग समुद्र में किसी भी खतरे से निपटने में कारगर सिद्ध होती है।
  • चीन के सरकारी अखबार ने शुक्रवार को ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें एच-6के बॉम्बर को द्वीप पर लैंडिंग, टेकऑफ और उड़ान भरते हुए दिखाया गया था।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

  • वॉशिंगटन स्थित सेंटर फॉर स्ट्रैटजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के बोनी ग्लेजर के मुताबिक, चीन ने वूडी द्वीप पर अपना एच-6 के बॉम्बर्स उतारा।
  • “मुझे लगता है कि चीन ने पहली बार ही दक्षिण चीन सागर में बॉम्बर उतारा। अब इसमें भी कोई शक नहीं कि चीन जल्द ही बॉम्बर्स को स्प्रैटली द्वीप पर भी उतारेगा।”

अमेरिका ने कहा- तनाव बढ़ेगा

  • पेंटागन के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल क्रिस्टोफर लोगान ने कहा कि चीन का ये अभ्यास बताता है कि वह दक्षिण चीन सागर में लगातार सैन्यीकरण कर रहा है। इससे क्षेत्र में तनाव बढ़ेगा।
  • इस साल फरवरी में अमेरिकी नेवी के एक अफसर कमांडर टिम हॉकिन्स ने कहा था कि अमेरिका साउथ चाइना सी के हर इस क्षेत्र में तैनात रहेगा जहां अंतर्राष्ट्रीय नियमों के तहत उसे इसकी अनुमति देते।
  • उन्होंने कहा, “अमेरिका कभी भी इस क्षेत्र पर अपनी दावेदारी नहीं करता, लेकिन क्षेत्र में नेविगेशन (समुद्र में आने-जाने) की आजादी का समर्थन करता है।” बता दें कि साउथ चाइना सी पर चीन अपना अधिकार बताता रहा है।
  • बता दें कि चीन अमेरिका पर इस क्षेत्र में अवैध रूप से घुसने के आरोप भी लगा चुका है। इसी के चलते हाल ही में उसने सुरक्षा का हवाला देते हुए SU-35 फाइटर जेट्स तैनात किए थे।

क्या है साउथ चाइना सी विवाद?

  • साउथ चाइना सी का करीब 35 लाख स्क्वेयर किमी एरिया विवादित है। इस पर चीन, फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ताइवान और ब्रुनेई दावा करते रहे हैं।
  • इस समुद्र से हर साल 5 लाख करोड़ यूएस डॉलर से ज्यादा का व्यापार होता है। यहां तेल और गैस के बड़े भंडार हैं। अमेरिका के मुताबिक इस इलाके में 213 अरब बैरल तेल और 900 ट्रिलियन क्यूबिक फीट नैचुरल गैस के भंडार है।
  • वियतनाम इस इलाके में भारत को तेल खोजने की कोशिशों में शामिल होने का न्यौता दे चुका है। चीन ने 2013 के आखिर में एक बड़ा प्रोजेक्ट चलाकर पानी में डूबे रीफ एरिया को आर्टिफिशियल आईलैंड में बदल दिया था।

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