केरल में जानलेवा निपाह (NiV) वायरस – अब तक 16 की मृत्यु

केरल के कोझिकोडे जिले में निपाह वायरस के संक्रमण से मरने वालों की संख्या 16 हो गई है।मृतकों में एक ही परिवार के चार लोग और इलाज में लगी एक नर्स भी शामिल हैं। चार की हालत गंभीर है। 25 लोगों को निगरानी में रखा गया है। पुणे के नेशनल वर्गोलॉजी इंस्टीट्यूट ने स्पष्ट किया है कि केरल के कोझिकोडे में संदिग्ध बीमारी से पीड़ित लोग निपाह वायरस से संक्रमित हैं। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने अभी सिर्फ तीन मौतों की पुष्टि की है।

ऐसा पहली बार देखने को मिला है जब इस बीमारी से मरने वालों की संख्या इतनी ज्यादा है। रिसर्च वैज्ञानिकों ने बताया है कि यह वायरस खासकर चमगादड़, सुअर और अन्य जानवरों के माध्यम से फैलता है।

निपाह वायरस के संक्रमण पर काबू पाने के लिए भारत सरकार ने विशेषज्ञों की एक टीम को केरल भेजा है। ताकि हालात पर समय रहते काबू पाया जा सके।

निपाह वायरस (NiV) से होने वाला संक्रमण एक ऐसा संक्रमण है जो जानवरों से इंसानों में फैलता है। यह वायरस जानवरों और इंसानों में गंभीर किस्म की बीमारी पैदा करता है। इस वायरस का प्रारंभिक स्रोत फल चूसने वाले चमगादड़ हैं।

क्या है निपाह वायरस और कैसे फैलता है इसका संक्रमण ?

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के मुताबिक, निपाह वायरस चमगादड़ से फलों में और फलों से इंसानों और जानवरों पर आक्रमण करता है।
  • 1998 में पहली बार मलेशिया के कांपुंग सुंगई निपाह में इसके मामले सामने आए थे। इसीलिए इसे निपाह वायरस नाम दिया गया। पहले इसका असर सुअरों में देखा गया।
  • 2004 में यह बांग्लादेश में इस वायरस के प्रकोप के मामले सामने आए थे। बताया जा रहा है कि केरल में यह पहली बार फैला है।
  • चूंकि निपाह वायरस संक्रमित चमगादड़ या सुअर से इंसान में फैलती है इसलिए इन जानवरों के सीधे संपर्क में आने से बचें। लोगों की यह भी सलाह है कि वे पेड़ पर पके फलों का सीधे  सेवन न करके रोगाणुनाशन के बाद ही सेवन करें।

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