भारत-चीन सीमा पर बनेगी देश की सबसे ऊँची सड़क

डोकलाम से लेकर अरुणाचल में भारत का चीन के साथ सीमा विवाद चला आ रहा है। चीन ने सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण वास्तविक नियंत्रण रेखा (एल॰ए॰सी॰) के नजदीक तक सड़कों का जाल बिछा दिया है। ऐसी स्थिति में भारत अरुणाचल प्रदेश में बार्डर से सटे क्षेत्र में 800 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने जा रहा है। केंद्र की तरफ से केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सी॰पी॰डब्ल्यू॰डी॰) को सड़क बनाने का काम सौंपा गया है, जो समुद्रतल से 14 से 18 हजार फीट की ऊंचाई पर एल॰ए॰सी॰ के नजदीक सड़क तैयार करेगा। सड़क बनाने का काम गाजियाबाद स्थित सी॰पी॰डब्ल्यू॰डी॰ एकेडमी के इंजीनियरों को सौंपा गया है।

सी॰पी॰डब्ल्यू॰डी॰ के महानिदेशक (डी॰जी॰) अभय सिन्हा ने बताया कि केंद्र सरकार से विभाग को अरुणाचल में नियंत्रण रेखा के नजदीक सड़क बनाने का टेंडर मिला है। यह सड़क करीब 24 हजार करोड़ रुपये से बनकर तैयार होगी। पहाड़ों पर 14 से 18 हजार फीट की ऊंचाई पर सड़क बनने में करीब दो साल का समय लगेगा। 800 किलोमीटर लंबी सड़क को नई तकनीक से बनाया जाना है, जिसका काम मई के अंत तक शुरू हो जाएगा। इसके बन जाने पर किसी भी तरह की आपात स्थित में सेना और अन्य सामग्री को नियंत्रण रेखा के नजदीक पहुंचाने में आसान होगी। इससे भारत सामरिक दृष्टि से काफी मजबूत होगा।

अभय सिन्हा का कहना है कि 350 किलोमीटर तक चार लेन की सड़क बनाई जाएगी, शेष सड़क दो लेन की होगी। भारत की चीन के साथ 3488 किलोमीटर लंबी सीमा मिलती है। बीते वर्षों में चीन ने एल॰ए॰सी॰ के नजदीक अपना सड़क नेटवर्क तैयार किया है, जिसके चलते कई जगहों पर उसकी स्थिति मजबूत हुई है। ऐसे में भारत तेजी से सीमा के नजदीक सड़क नेटवर्क तैयार करना चाहता है। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के महानिदेशक अभय सिन्हा ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश में सी॰पी॰डब्ल्यू॰डी॰ जल्द ही वास्तविक नियंत्रण रेखा के नजदीक 24 हजार करोड़ रुपये की लागत से 800 किमी सड़क बनाएगा। यह देश की सर्वोच्च ऊंचाई पर बनने वाले पहली इतनी लंबी सड़क होगी। मई के अंत तक निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।

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