कठुआ का सच

जम्मू एवं कश्मीर के कठुआ में आठ साल की बच्ची के साथ गैंगरेप और हत्या के मामले को लेकर सोशल मीडिया पर इन दिनों कई तरह की कंसपिरेसी थ्योरी गढ़ी जा रही हैं। परन्तु यह पूरा मामला आरोपियों को फंसाने के लिए रची गई साज़िश लग रहा है।

बार एसोसिएशन समेत कठुआ के तमाम लोग चार्जशीट को संदेह की दृष्टि से देख रहे हैं। चार्जशीट में जो बातें कही गई हैं वह मौके पर कहानी से मेल नहीं खाती। सर्वोच्च न्यायालय की वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीमती मोनिका अरोड़ा ने कठुआ का दौरा किया और ये तथ्य एक प्रेस वार्ता के माध्यम से उजागर किए —

  1. देवस्थान तीन दरवाजों से जुड़ा हुआ है, कुल देवता के स्थान पर प्रतिदिन दो वक्त ज्योत जलाई ही जाती है। प्रतिदिन कोई ना कोई अलग अलग गाँवो से ज्योत जलाने आता ही है। यहाँ किसी को बंधक बनाकर रखना संभव ही नहीं है।
  2. जिस जगह पर नाबालिग का शव मिला। वो जगह सांझी राम के घर और देवस्थान को जोड़ती है। सांझी राम के घर के रास्ते के बीच शव क्यों फेंका, जबकि आरोपियों को मालूम था कि वहाँ से हर रोज कई लोग गुजरते हैं।
  3. क्राइम ब्रांच की रिपोर्ट के विरोध में गाँव के ज्यादातर लोग भूख हड़ताल पर हैं। इनमें महिलाएँ भी हैं। जब बच्ची लापता हुई थी तो पुलिस ने चाचा से पूछताछ की थी। बच्ची का शव मिलने के बाद से चाचा गायब है।
  4. गाँव में डेरे में रहने वाले मोहम्मद कालू बकरबाल के अनुसार गाँव में आज तक कभी धर्म को लेकर कोई झगड़ा नहीं हुआ है। वह इंसाफ चाहते हैं।
  5. घटना जम्मू के कठुवा में संभवतः जनवरी में घटित हुई।
  6. जम्मू का यह इलाक़ा कश्मीर घाटी के विपरीत शांत और हिन्दू बहुल है।
  7. मृत बालिका बंजारा प्रवृत्ति वाले बकरवाल मुस्लिम समुदाय से थी। उसके माता-पिता का निधन हो चुका था और वह अपने रिश्तेदार के साथ रहती थी। उसके नाम थोड़ी पारिवारिक संपत्ति भी थी।
  8. कठुवा के इस इलाक़े में कुछ वर्षों से अवैध रोहिंग्या बसाहट हो रही है।
  9. जनवरी में मृत बालिका के लापता हो जाने के कुछ दिनों बाद शव मंदिर में पाया गया।
  10. पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची के साथ बलात्कार की घटना से इंकार किया गया।
  11. मंदिर आबादी के बीच है जहाँ कोई लॉक करने योग्य दरवाजा नहीं है। मंदिर हमेशा खुला रहता है, यहाँ रोज़ लोग आते हैं, यहाँ किसी को 8 दिनों तक बंधक बनाने योग्य जगह नहीं है।
  12. बालिका के शरीर पर गीली मिट्टी लिपटी हुई थी, अर्थात् उसकी हत्या के पूर्व उसे मिट्टी पर लिटाया/घसीटा गया था।
  13. मंदिर मार्बल का है, जहाँ कीचड़ नहीं होता है और पोस्टमार्टम में बताये गए मृत्यु के समय पर आसपास कहीं बारिश नहीं हुई थी। संभवतः हत्या कहीं और कर उसका शव कुछ समय पहले मंदिर में डाला गया था।
  14. मंदिर जिस तरह आबादी के बीच है, संभव नहीं है कि वहां 8 दिनों तक शव सड़ता रहे और लोगों को पता न चले।
  15. घटना के बाद जब स्थानीय पत्रकार वहाँ पहुँचे तब रोहिंग्या लोगों ने उनके साथ मारपीट की।
  16. मिडिया के एक तबके ने घटना के साथ हिन्दू आरोपी और घटनास्थल के रूप में मंदिर शब्द विशेष रूप से उछला।
  17. भाजपा के विधायकों ने राज्य सरकार से के सी॰बी॰आई॰ जाँच करने का केंद्र से अनुरोध करने को कहा।
  18. मुफ़्ती सरकार ने सी॰बी॰आई॰ जाँच का अनुरोध न करते हुए जाँच के लिए एस॰आई॰टी॰ का गठन कर दिया।
  19. कश्मीर में घटना के विरोध में आंदोलनों का नेतृत्व ग़ुलाम नबी आज़ाद के प्रमुख सहयोगी कर रहे हैं।
  20. बकरवाल मुस्लिम भारतीय सेना के प्रमुख सहयोगी हैं जो सेना के लिए दुर्गम स्थानों पर खच्चर पर लाद कर रसद पहुँचाने का काम करते हैं। कारगिल युद्ध में भी उनकी सेवा विशेष रूप से उल्लेखनीय है। अब उनमें भारतीय सेना और भारत के ख़िलाफ़ आक्रोश भड़काया जा रहा है।

पहले भी 2003 में शोपियाँ में भी एक 22 वर्षीय महिला और उसकी 17 वर्षीय ननद अपने सेव के बगीचे से गायब हो गयीं थी और उनके शव समीप के नाले में मिले थे।

स्थानीय पुलिस जाँच में पाया गया कि अचानक बादल फटने और बाढ़ आने से दोनों युवतियाँ बह कर मारी गयीं। अलगाववादियों ने कहा कि भारतीय सेना ने उनका बलात्कार कर हत्या की है। उमर अब्दुल्ला ने स्थानीय पुलिस की जाँच को नकारते हुए 17 अधिकारियो को सस्पेंड कर जेल भेजा और जाँच के लिए न्यायिक कमेटी का गठन किया।सभी 17 निलंबित अधिकारीयों को दोषमुक्त पाया गया। किन्तु इस घटना से कश्मीर में व्यापक हिंसा, प्रदर्शन और असंतोष के चलते 47 दिनों तक कर्फ़्यू लागू रहा।

क्या आपको नहीं लगता कि सरकार को अस्थिर करने के लिए लंबे समय से षडयंत्र चल रहे हैं? कभी अवार्ड वापसी, कभी पटेल आरक्षण, कभी कोरेगांव हिंसा, कभी जुनैद, कभी अख़लाक़, कभी ऊना कभी लिंगायत?

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