गिलगिट-बाल्टिस्तान में पाक की दादागिरी के खिलाफ प्रदर्शन, भारत ने दी चेतावनी

गिलगित-बाल्टिस्तान की स्थानीय परिषद के अधिकारों को सीमित करने के पाकिस्तान सरकार के फैसले पर भारत ने कड़ा विरोध जताया है। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी उप उच्चायुक्त सैयद हैदर शाह को तलब कर पाकिस्तान सरकार के कदम पर एतराज जताया है। कहा है कि गिलगित-बाल्टिस्तान का इलाका जम्मू-कश्मीर का हिस्सा और भारत का अभिन्न अंग है। इस हिस्से पर पाकिस्तान ने सन 1947 में आक्रमण कर कब्जा कर लिया था। इसलिए उसे इलाके की स्थिति में बदलाव का कानूनी अधिकार नहीं है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खाकन अब्बासी ने 21 मई को एक आदेश जारी कर इलाके की स्थानीय परिषद के अहम अधिकारों को खत्म कर दिया है। इन अधिकारों से परिषद स्थानीय मामलों पर फैसला लेती थी। इस फैसले को सरकार की ओर से गिलगित-बाल्टिस्तान को पांचवाँ प्रांत बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। पाकिस्तान के मानवाधिकार संगठनों ने प्रधानमंत्री के फैसले की निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि जबरन कब्जा किए गए इलाके की स्थिति बदलने वाला पाकिस्तान सरकार का फैसला अस्वीकार है। यह गुलाम कश्मीर के लोगों के अधिकारों का भी उल्लंघन है। पाकिस्तान इस इलाके से अपना अवैध कब्जा खत्म कर उसे भारत के हवाले करे।

विरोध प्रदर्शन के दौरान कई घायल

प्रधानमंत्री अब्बासी के गिलगित-बाल्टिस्तान को लेकर दिए गए आदेश का इलाके की जनता में व्यापक विरोध शुरू हो गया है। पेशावर इलाके में प्रदर्शनकारियों और पुलिस की भिड़ंत में कई लोगों के घायल होने की खबर है। सरकार के खिलाफ विरोध जताने के लिए प्रदर्शनकारी जब गिलगित-बाल्टिस्तान असेंबली की ओर जा रहे थे, तभी उन्हें रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और हवाई फायरिंग की। इस प्रदर्शन में सभी दलों के लोग शामिल थे और वे संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे थे।

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