आतंकी था दिल्ली के जामिया विश्वविद्यालय का शोध छात्र, कश्मीर में सेना ने मारा

खतरनाक मंसूबे : 2016 से राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में था संलिप्त, प्रशासनिक सेवा अधिकारी बनने के लिये भी कर रहा था तैयारी

बेरोजगारी और गरीबी नहीं, मज़हबी कट्टरता ही है आतंक की पौधशाला। श्रीनगर के नौगांव स्थित सूथू में बुधवार को मारे गये दो आतंकियों में से एक सबजार अहमद सोफी इस बात का प्रमाण है। मध्यम वर्ग परिवार में जन्मा सबजार बचपन से ही पढ़ने में तेज था, घर में अपना पुस्तकालय भी था लेकिन कट्टर मज़हबी तामील ने एक और प्रतिभा को बरबाद कर दिया। सुरक्षा एजेंसियाँ जाँच कर रहीं हैं कि दिल्ली के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय जामिया मिलिया इस्लामिया का छात्र आतंकियों के संपर्क में कैसे आया? 

सूत्रों के अनुसार वर्ष 2016 से राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में संलिप्त सबजार अहमद प्रशासनिक सेवा अधिकारी बनने के लिये भी तैयारी कर रहा था। राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में संलिप्त व्यक्ति और संगठनों की इस स्तर तक सोच और दूरदर्शी योजना जिसमें देश के ही युवाओं को भ्रमित कर उनका प्रयोग हो रहा हो, यह देश की सुरक्षा और अखण्डता के लिये बेहद खतरनाक है।

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