राफ़ैल के बाद अब चिनूक हेलिकॉप्टर भी वायुसेना में शामिल, दुश्मनों के उड़ेंगे छक्के

लम्बे इन्तज़ार के बाद अमेरिका से ख़रीदे गए चार चिनूक हेलिकॉप्टर को भारतीय वायुसेना शामिल कर लिया गया है, जबकि 11 चिनूक हेलिकॉप्टर अभी और शामिल होना बाकी हैं। चंडीगढ़ एयरबेस पर चिनूक हेलिकॉप्टर को भारतीय वायुसेना में शामिल किए जाने के बाद वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ ने इसे वायुसेना के लिए अमूल्य धरोहर बताया है।

चिनूक हेलिकॉप्टर की ताकत और उपयोगिता बताते हुए वायुसेना प्रमुख ने कहा

चिनूक हेलिकॉप्टर सैन्य अभियानों में प्रयोग किया जा सकता है। सिर्फ दिन में ही नहीं रात में भी प्रयोग हो सकता है, इसकी दूसरी यूनिट पूर्व में दिनजान (असम) में होगी। चिनूक को वायुसेना में शामिल करना गेमचेंजर साबित होगा ठीक वैसे ही जैसे फाइटर क्षेत्र में राफेल को शामिल करना।

बेहद शक्तिशाली है चिनूक हेलिकॉप्टर

यह विशाल हेलिकॉप्टर 9.6 टन तक कार्गो ले जा सकता है। इसमें भारी मशीनरी, आर्टिलरी बंदूकें और हाई अल्टीट्यूड वाले लाइट आर्मर्ड वीकल्स शामिल हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में ऑपरेशन के लिए इन्हें इस्तेमाल किया जा सकता है। चिनूक काफी गतिशील है और ये घनी घाटियों में भी आसानी से आ-जा सकता है। सैन्य जहाजों की आवाजाही से लेकर यह डिजास्ट रिलीफ ऑपरेशंस जैसे मिशन में भी अपना काम अच्छी तरह करता है।

CH-47F चिनूक से जुड़ी खास बातें

मशीन: यह आइकॉनिक ट्विन रोटोर चॉपर युद्ध में अपनी जरूरत को कई बार साबित कर चुका है। चिनूक हेलिकॉप्टर्स को वियतनाम से लेकर अफगानिस्तान और इराक तक के युद्ध में इस्तेमाल किया जा चुका है। सबसे पहले चिनूक हेलिकॉप्टर को 1962 में उड़ाया गया था और तब से अब तक इसकी मशीन में बड़े अपग्रेड हो चुके हैं। फिलहाल यह दुनिया के सबसे भारी लिफ्ट चौपर में से एक है।

अमेरिका से 17000 करोड़ में हुआ था सौदा

भारत ने 2015 में अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी बोइंग से 15 चिनूक हेलिकॉप्टर खरीदने का सौदा किया था। 2.5 अरब डॉलर (करीब 17 हजार करोड़ रुपए) के इस सौदे में 22 अपाचे हेलिकॉप्टर भी शामिल हैं।

इससे पहले अमेरिका के फिलाडेल्फिया में बोइंग ने इसी हफ्ते भारत को पहले चिनूक हेलिकॉप्टर की खेप आधिकारिक रूप से सौंप दी थी। डील के मुताबिक, इस साल के अंत तक भारत को सभी अपाचे और चिनूक हेलिकॉप्टर मिल जाएंगे। इससे वायुसेना की ताकत में काफी इजाफा होगा। अपाचे दुनिया के सबसे अच्छे लड़ाकू हेलिकॉप्टर माने जाते हैं। अमेरिकी सेना लंबे समय से अपाचे और चिनूक का इस्तेमाल कर रही है।

भारत अपाचे का इस्तेमाल करने वाला 14वां और चिनूक को इस्तेमाल करने वाला 19वां देश होगा। बोइंग ने 2018 में वायुसेना के पायलटों और फ्लाइट इंजीनियरों को चिनूक हेलिकॉप्टर उड़ाने की ट्रेनिंग भी दी थी।

दुनिया देखेगी भारतीय वायुसेना का दम

चिनूक के भारतीय एयरफोर्स के बेड़े में शामिल होने से न केवल सेना की क्षमता बढे़गी बल्कि कठिन रास्ते और बॉर्डर पर इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट को बनाने में भी इसका अहम योगदान रह सकता है। नॉर्थ ईस्ट में कई रोड प्रोजेक्ट सालों से अटके पड़े हैं और उन्हें पूरा करने के लिए बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन लंबे समय से एक हेवी लिफ्ट चॉपर का इंतजार कर रहा है जो इन घनी घाटियों में सामग्री और जरूरी मशीनों की आवाजाही कर सके।

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