पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक के बाद आख़िर PM मोदी की वापसी मुमकिन क्यों है?

राष्ट्रीय सुरक्षा के मसलों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निस्सन्देह अद्भुत काम किया है। ये पहली बार है कि पाकिस्तान पर पहले सर्जिकल स्ट्राइक और फिर एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान भारत के सामने घुटने टेकने को मज़बूर हुआ है। यही नहीं एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान के ख़िलाफ़ अन्तरार्ष्ट्रीय मंच पर अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन, जर्मनी समेत कई देश आतंकवाद के ख़िलाफ भारत के साथ कन्धे से कन्धा मिलाए खड़े दिखे हैं।

दूसरी तरफ बलुचिस्तान में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन ने भी पाकिस्तान को अन्तर्राष्ट्रीय फलक पर नंगा किया है। भारत में मोदी सरकार बनने के बाद से ही बलूचिस्तान पाकिस्तान से अलग होने के लिए कई बार बड़े आन्दोलन कर चुका है और भारत में शामिल होने की इच्छा जताई है। जो कि मोदी सरकार की दुश्मन देश के ख़िलाफ़ बड़ी कूटनीतिक क़ामयाबी है। बलूचिस्तान में आए दिन होने वाले हमले और पाकिस्तान के ख़िलाफ़ आन्दोलन इसका प्रमाण हैं।

इतिहास पर नज़र दौड़ाएं तो देश में कुछ ऐसा ही माहौल है जैसा कि साल 1971 में पूर्वी पाकिस्तान के बांग्लादेश में बदलने का था। जिस तरह बलूचिस्तान आज भारत की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहा है। इसी तरह 1971 में बांग्लादेश यानी तब का पूर्वी पाकिस्तान शेख मुजीबुर्रहमान के नेतृत्व में पाकिस्तान से अलग होना चाहता था। तो, तत्कालीन पाकिस्तान सरकार शेख मुजीबुर्रहमान पर भारत के साथ मिलकर देश तोड़ने का आरोप लगाती थी। ऐसे ही आरोप आज की पाकिस्तान सरकार बलोच नेताओं पर भी लगाती है कि वो भारत के साथ मिलकर पाकिस्तान को तोड़ने की साज़िश रच रहे हैं।

इतिहास गवाह है कि जब जब भारत ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के मसलों पर देश की सम्प्रभुता की रक्षा के लिए पाकिस्तान को घुड़की दी है भारत के नेताओं ने प्रधानमंत्री की कुर्सी पर विजय पताका फहराई है। साल 1965 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ भारत को मिली जीत ने इंदिरा गाँधी को 1967 में सत्ता दिला दी थी। तो, 1971 में पाकिस्तान के दो टुकड़े करके बांग्लादेश बनाने पर देश की जनता ने इंदिरा गाँधी को 352 सीटें जितवा कर पूर्ण बहुमत की सरकार दे दी थी।

ठीक इसी तरह पाकिस्तान के ख़िलाफ़ पहले सर्जिकल स्ट्राइक और फिर आतंकवादी ट्रेनिंग कैम्पों पर एयर स्ट्राइक के बाद देश को और देश की जनता को ये भरोसा हो गया है कि 21वीं शताब्दी में भारत का भविष्य पीएम मोदी के हाथों में ही सुरक्षित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व पटल पर 21वीं सदी के सबसे सख़्त नेता बनकर उभरे हैं।

पाकिस्तान में बलूचिस्तान को आजाद करने की मांग लगातार जोर पकड़ रही है और बलूची नेता सोशल मीडिया का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने पाकिस्तान आर्मी के खिलाफ एक नारा दिया था, ‘ये जो दहशतगर्दी है इसके पीछे वर्दी है।’ यह नारा सोशल मीडिया में बहुत चर्चा का विषय भी बना। जिसके बाद जनवरी महीने में ही पाकिस्तानी सेना ने बलोच लोगों की बगावत के डर से उनके सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है।

यही नहीं, जब कभी पाकिस्तान कश्मीर की बात उठाता है तो भारत की तरफ से भी अब बलूचिस्तान की बात उठाई जाती है। 2016 में तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से अपनी स्पीच में बलूचिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में मानवाधिकारों के हनन का मसला उठाया था। जिससे डरकर पाकिस्तानी सेना ने अपनी कई टुकड़ियों को सिर्फ वहाँ इसलिए तैनात किया है कि जिससे बलूच लोगों पर नज़र रखी जा सके।

इन परिस्थितियों से साफ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान को उसके घर के अन्दर ही घेर लिया है। जिससे पाकिस्तानी अपने अन्दरूनी हालातों में ही उलझा रहे। निश्चित ही कूटनीतिक पटल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ये बड़ी क़ामयाबी है और इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं की 23 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में माँ भारती को एक बार फिर मज़बूत सरकार मिलेगी।

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