A-SAT क्यों है महत्वपूर्ण

कल जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सीधे प्रसारण में ये घोषणा की कि भारत अब अंतरिक्ष महाशक्तियों में सम्मिलित हो गया है तब बहुत से लोगों को तो इसकी कल्पना भी नहीं होगी कि इस न दिखने वाली घटना का महत्व कितना है। इसे समझने के लिए युद्ध नीति, तकनीकि, वैश्विक राजनीति को समझना भी आवश्यक है।

1974 जब भारत ने सफल परमाणु परिक्षण किया तो पाकिस्तान की सत्ता के गलियारों में हलचल होने लगी। अभी तीन वर्ष पहले ही भारत ने पाकिस्तान को युद्ध मे परास्त कर उसके के दो टुकड़े कर दिए थे और ये परमाणु बम का खतरा पाकिस्तान पर मंडराने लगा था। क्या भारत फिर से युद्ध की तैयारी कर रहा था? यह प्रश्न संभवतः बार बार पाकिस्तान के हर नागरिक के मन में आ रहा था। सीमा के उस पार यह निर्णय लिया गया की वे भी परमाणु हथियार बनाएंगे। दक्षिणी एशिया में शक्ती संतुलन स्थापित करने के बहाने पाकिस्तान ने भी यह अस्त्र बनाया परंतु 1998 तक उन्होने परमाणु शस्त्र का परिक्षण नहीं किया था। जब भारत ने दूसरी बार परिक्षण किया तब पाकिस्तान ने भी अपना बल दिखाया। और इसी के साथ दोनो पड़ोसियों के बीच तथाकथित संतुलन की स्थिति आ गई। वह बात और है कि प्रत्यक्ष युद्ध में जीतने की क्षमता न होने के कारण पाकिस्तान आतंकवाद का सहारा लेता है।

उधर दूसरी और हमारा पड़ोसी चीन भी इस संतुलन से खुश नहीं था कि भारत और चीन दोनो परमाणु शक्ति हैं। 2007में चीन ने पहली बार ऐन्टी सैटेलाइट मिसाइल का परिक्षण किया। पूरे विश्व में उस परिक्षण की निंदा की गई क्यूँकि जिस उपग्रह को चीन ने निशाना बनाया उसके लगभग 3000 टुकड़े हुए और वे अन्य उपग्रहों के लिए एक खतरा बन गए।

भारत के वैज्ञानिकों ने 2007 में ही A-SAT का प्रस्ताव तत्कालीन सरकार के समक्ष रखा था। परंतु तब की भारत सरकार ने इस पर कोई निर्णय नहीं दिया। 2012 में फिर सरकार से पूछा गया तब भी कोई निर्णय नहीं आया। आखिर क्या कारण रहा होगा, क्या दबाव रहा होगा भारत सरकार पर कि वह इस परिक्षण की आज्ञा नहीं दे पा रही थी?कुछ ही दिनों पहले एक फिल्म ‘परमाणु’में हमने देखा की किस प्रकार अमरीका उस समय भी भारत पर नज़र लगाए बैठा था जब हम परमाणु परिक्षण करना चाह रहे थे। संभवतः उसी प्रकार A-SAT परिक्षण न करने के लिए भी कोई वैश्विक दबाव रहा होगा।

बात ये है कि उपग्रह गिराने की क्षमता के साथ ही भारत के पास अब वह हथियार आ गया है जिसके कारण भारत दूर बैठे ही किसी भी देश की दूरसंचार प्रणाली और GPS प्रणाली दोनो नष्ट कर सकता है। इसका परिणाम ये होगा कि युद्ध की स्थिति में अब पाकिस्तान जैसा देश अपनी कोई भी मिसाइल प्रभावशाली ठंग से काम में नहीं ले पाएगा। बिना GPSएवं संचार व्यवस्था के किसी भी सैन्य शक्ति का काम कर पाना बहुत ही कठिन है।

उपग्रह बहुत तीव्र गती से पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं। तेज़ गति से चलने वाले इन उपग्रह को गिराने से ये भी सिद्ध हो गया है कि हम भारत की ओर आने वाली मिसाइलें भी अब गिरा सकते हैं। पाकिस्तान को इसी बात की चिन्ता है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व को यह भी साफ साफ बताया कि भारत अपनी जिम्मेदारी समझता है। इस उपलब्धी का उपयोग कभी भी क्षेत्र में अशांति फैलाने के लिए नहीं होगा। इसका उपयोग केवल और केवल भारत की रक्षा और क्षेत्र में शान्ति बनाए रखने के लिए किया जाएगा।

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