क्या है 11 वैज्ञानिकों की मृत्यु का रहस्य?

2009 से 2011 के बीच भारत के 11 परमाणु वैज्ञानिकों की संदिग्ध मृत्यु हई। यह जानकारी 2015 में भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग ने एक RTI आवेदन के जवाब में दी। इन ग्यारह में से आठ की मृत्यु प्रयोगशाला या अनुसंधान केन्द्र में विस्फोट या फाँसी लटकने या समुद्र में डूबने से हुई। हरियाणा के राहुल सेहरावत द्वारा 21 सितम्बर 2015 को दिए गए RTI आवेदन के जवाब में परमाणु ऊर्जा विभाग ने यह भी जानकारी दी कि न्यूक्लीयर पावर कॉरपोरेशन के तीन वैज्ञानिकों की मृत्यु संदिग्ध अवस्था में हुई। दो ने आत्महत्या की और एक की मृत्यु सढ़क दुर्घटना मे हुई।

क्यूँ करें संदेह?

इतने कम समय इतनी अधिक मृत्यु की घटनाएँ संदेह पैदा करती हैं। 2010 में बी॰ए॰आर॰सी ट्रॉम्बे के दो सी-ग्रुप के वैज्ञानिकों का शव लटका हुआ पाया गया। जबकी उसी ग्रेड के एक वैज्ञानिक का शव 2012 में राजस्थान के रावतभाटा स्थित परमाणु शक्ति परियोजना में उनके निवास स्थान पर पाया गया।

इनमें से बी॰ए॰आर॰सी के एक केस में तो पुलिस ने यह दावा किया कि वैज्ञानिक अपनी लम्बी बिमारी के चलते परेशान था इसलिए आत्महत्या करने का कदम उठाया। और फिर वह केस वहीं बंद कर दिया गया। बाकी के केस अभी भी जाँच के विषय हैं।

2010 में दो शोधकर्ताओं की मृत्यु रसायन की प्रयोगशाला में एक रहस्यमय आग लगने से हुई।

एक एफ-ग्रेड के वैज्ञानिक की हत्या उनके मुम्बई स्थित निवास स्थान पर ही कर दी गई। इनके हत्यारे का अभी तक नहीं चल पाया है।

RRCAT के एक डी-ग्रेड के वैज्ञानिक की मृत्यु आत्महत्या से हुई। केस जल्द ही बंद कर दिया गया।

2013 में कलपक्कम में एक केस में एक वैज्ञानिक की मृत्यु समुद्र में डूबने से हुई। एक अन्य केस में मुंबई में एक वैज्ञानिक नें व्यक्तिगत कारणों से आत्महत्या कर ली। पुलिस द्वारा ऐसी जानकारी दी गई।

एक वैज्ञानिक ने अपनी जान कारवार, कर्नाटका स्थित काली नदी में कूदकर दे दी। पुलिस ने यहाँ भी व्यक्तिगत कारण बताया।

यह नया नहीं है

ऐसा नहीं है कि संदिग्ध मृत्युओं का यह क्रम कोई नया था। डॉ होमी जहांगीर भाभा की मृत्यु 1966 में एक विमान के दुर्घटना ग्रस्त हो जाने से हुई। इस दुर्घटने से कुछ ही पहले उन्होंने यह बयान दिया था की भारत जल्द ही परमाणु उपकरण बनाने जा रहा है। विमान माउंट ब्लैंक स्थित स्विस एल्प्स पर्वतों में दुर्घटना ग्रस्त हुआ परंतु उस विमान के अवशेष कभी भी नहीं मिले।

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