1987 के बोफोर्स घोटाले के बाद पहली बार सेना को मिली भारत में निर्मित 155mm Howitzer “धनुष”

भारत-चीन तथा भारत-पाकिस्तान सीमाओं पर बढ़ते तनाव के चलते भारत सरकान ने बहुत सी महत्वपूर्ण रक्षा परियोजनाओं की गति को बढ़ाने का निर्णय किया। इसका परिणाम यह हुआ कि बोफोर्स घोटाले के 32 वर्ष बाद भारत में निर्मित 155mm Howitzerकोसेना में सम्मिलित किया गया।

45 कैलिबर बैरल माप की यह “देसी बोफोर्स” कही जाने वाली “धनुष”वास्तव में बोफोर्स से कई गुना अधिक सक्षम है। जहाँ बोफोर्स की मारक क्षमता 27किलोमीटर है वहीं “धनुष” की क्षमता 38 किलोमीटर की है,11 किलोमीटर अधिक।

पूर्णतः भारत में ही निर्मित इस towed howitzer को आयुध निर्माणी बोर्ड, कोलकाता द्वारा विकसित किया गया है। इसका उत्पादन गन कैरिज फैक्ट्री जबलपुर (GCF)में किया जा रहा है। 1980 के दशक में जब बोफोर्स सौदा हुआ था तब इससे संबंधित 12000 पृष्ठों का डिजाइन दस्तावेज भी भारत को मिला था। परंतु 155mm की 39 कैलिबर वाली बोफोर्स तोप का तकनीकि स्थानांतरण घोटाला उजागर होने के कारण पूर्ण नहीं हो पाया था जिसके कारण आयुध निर्माण बोर्ड को बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

155mm की यह तोप भारतीय सेना के लिए अत्यंत आवश्यकता है। इसलिए भारत ने कई विदेशी कंपनियों की भी मदद् लेने का प्रयास किया। इजराइल की कंपनी Soltamकी मदद् से रूस में निर्मित 130mm की बंदूक को 155mm तक विकसित करने का प्रयास किया गया परंतु इसमें सफलता नहीं मिली। बोफोर्स घोटाले के सामने आने के बाद बहुत सी कंपनियों को ब्लैक लिस्ट भी किया गया – Soltam, Denel, Singapore Technologies Kinetics and Rheinmetallके ब्लैक लिस्ट होने के बाद आयुध निर्माण बोर्ड ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के साथ मिल कर इस तोप को स्वयंभारत मेंही विकसित किया। गर्व की बात ये है कि इसके 90% हिस्से भारत में ही निर्मित हैं। तो किसी अन्य देश पर इसके लिख कोई निर्भरता नहीं है।

अलग अलग ऋतओं और स्थानों में 2000 गोले दागने के बाद उससे मिले आंकड़ों के आधार पर एक प्रभावशालि तोप का रूप तैयार किया गया है। इस तोप का सिक्किम, लेह, बालासोर (उड़ीसा), बबीना (झाँसी), पोखरण आदि स्थानों पर अलग अलग ऋतुओं में परिक्षण किया गया।

14.50 करोड़ की लागत वाली यह बंदूक विश्व के अन्य देशों द्वारा प्रयोग में लाई जाने वाली श्रेष्ठतम howitzer बंदूकों के तुलनीय है। इसका एक गोला 1 लाख रुपए की लागत से तैयार होता है। प्ररंभ में 6 फिर बाद में 114 “धनुष” तोपों को सेना में सम्मिलित किया जाएगा। परंतु सेना को अभी भी बहुत बड़ी संख्या में इस प्रकार की तोपों की आवश्यकता सीमा सुरक्षा के लिए पड़ती है। K9 Vajra एवं M-777 ultra-light तोपों के बाद “धनुष” तीसरी howitzer है जो सेना में सम्मिलित की गई है।

भारत की दो सीमाएँ लगभग तनाव की स्थिति में ही रहती हैं। ऐसे में 32 वर्ष तक “धनुष” जैसी तोप की कमी को सेना ने भली भाँति अनुभव किया है। पर्याप्त मात्रा में हथियारों के न होने से हमारे शत्रुओं के हौसले भी बढ़े हैं जिसके कारण हमें भारी नुकसान उठाना पड़ा है। अब जब सेना में इसे सम्मिलित किया गया है तब न केवल सैनिकों का बल्की देश के वैज्ञानिको एवं अभियंताओं का भी आत्मविश्वास बढ़ा है।

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