अनुच्छेद 370 : विश्व पटल पर नवीन स्वरूप में भारत

धारा 370 हटाना केंद्र सरकार का साहसिक व ऐतिहासिक निर्णय है। भारत अब वास्तव में अखंड हो गया है। केंद्र सरकार के जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने से पकिस्तान बौखलाया हुआ है। 5 अगस्त को खबर पाकिस्तानी मीडिया में आने के बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को अपने ही देश में डर लग रहा है और उन्हें ये डर इसलिए लग रहा है क्योंकि उनके देश की जनता अब उनसे इस मामले में सवाल पूछ रही है जिसका जवाब इमरान खान के पास नहीं है। इमरान खान की धड़कने तब और तेज़ हुई जब अमेरिका सहित कई और देशों ने भारत के इस फैसले को अच्छा खासा समर्थन दिया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने मान लिया है कि वे कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने में असफल रहे। इमरान ने कहा कि वे इस मुद्दे की गंभीरता को न समझ पाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से खफा हैं। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद बीते कुछ समय से ही पाक हर वैश्विक मंच पर इस मुद्दे को उठाता रहा है, लेकिन चीन के अलावा उसे अब तक किसी भी देश का साथ नहीं मिला।

इमरान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर एक कार्यक्रम के दौरान कहा, “मैं अंतरराष्ट्रीय समुदाय से निराश हूं। अगर 80 लाख यूरोपियन या ज्यूस (यहूदी) या सिर्फ 8 अमेरिकी ही कहीं फंसे होते तो क्या वैश्विक नेताओं का रवैया ऐसा होता? मोदी पर अब तक प्रतिबंध खत्म करने का कोई दबाव नहीं बनाया गया है, लेकिन हम उन पर दबाव बनाना जारी रखेंगे। 

दरअसल अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद घाटी में जैसे उपद्रव की आशंका जताई जा रही थी, वैसा अब तक कुछ देखने को नहीं मिला है। यह सही है कि उपद्रवी पाकिस्तानपरस्त नेताओं का जेल में होना और इंटरनेट पर प्रतिबंध भी एक मुख्य कारण है। हालांकि वर्तमान स्थिति में यह पाकिस्तान के लिए निराशाजनक है, क्योंकि कश्मीर में उपद्रव पर ही उसकी सारी कूटनीति निर्भर है। जब-जब कश्मीर आंतरिक तौर पर स्थिर हुआ है तब-तब पाकिस्तान ने उसे अस्थिर करने की कोशिश की है। यही कारण है कि  पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान बार-बार दुनिया के सामने झूठ बोल रहे थे कि भारत कश्मीर में मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है, वह कह रहे थे कि इस मसले में अंतराष्ट्रीय समुदाय उनके साथ है मगर जब पाकिस्तान ने UNHRC की बैठक में अपनी इन्हीं बातों को दौहराया तो दुनिया के किसी भी देश ने उसका समर्थन नहीं किया। जिस कारण पाकिस्तान का कश्मीर मसले पर झूठ एक बार से सबके सामने आ गया। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि कश्मीर मसले पर भारत के खिलाफ इस्लामिक देश उसका सहयोग देंगे, मगर यहां भी उसके हाथ निराशा ही लगी। इस बैठक में इस्लामिक सहयोग संगठन के 15 देश भी शामिल थे मगर भारत के खिलाफ पाकिस्तान के झूठ का किसी भी देश ने सर्मथन नहीं किया।

हाल ही में अमेरिका ने इसे भारत का अंदरूनी मामला कह कर भारत का साथ दिया और अब मालदीव ने भी भारत का समर्थन करते हुए ये बोल दिया है कि जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा है और उसे देश की ज़रूरतों के अनुसार देश के कायदे-कानून बनाने और बदलने का पूरा अधिकार है। मालदीव का समर्थन काफी अहम् माना जा रहा है। आपको बता दे कि चीन ने भारत के इस फैसले का पूरी तरह विरोध किया था लेकिन मालदीव के इस बयान के बाद अब चीन का विरोध भी फींका पड़ता नज़र आ रहा है। ऐसे में पकिस्तान की हालत और भी कमज़ोर होती दिख रही है। सरकार ने जम्मू-कश्मीर में बदलाव का ये फैसला अपनी पूरी तैयारी के साथ लिया है। बताया जा रहा है कि विदेश मंत्रालय ने ये फैसला लेने से पहले ही अमेरिका सहित सभी बड़े देशों से इसके बारे में बात कर ली थी जिसकी वजह से पाकिस्तान का झूठ भी अब कुछ काम नहीं आ रहा है। खबर ये भी है भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर इस फैसले को लेकर लगतार अमेरिका और अन्य अहम देशों के संपर्क में हैं। इन सभी बातो से ये तो साफ़ है कि सरकार ने ये फैसला पूरा होमवर्क करने के बाद ही लिया है।

भारत सरकार के ऐतिहासिक फैसले के बाद पाकिस्तान जिस तरह अपनी बौखलाहट का अभद्र प्रदर्शन कर रहा है, उससे उसकी जगहंसाई ही हो रही है। हैरानी यह है कि वह इस सच्चाई को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं कि चीन को छोड़कर अन्य कोई प्रमुख देश उसका रुदन सुनने को तैयार नहीं। कम से कम अब तो पाकिस्तान को यह आभास हो ही जाना चाहिए कि वह इस छलावे में जी रहा था कि कश्मीर उसका है और एक दिन उसे हासिल करके रहेगा। इस छलावे के चलते ही उसने अपनी सेना को अपने पर हावी होने दिया। चूंकि पाकिस्तान ने इस सच का सामना करने से जान-बूझकर इनकार किया कि कश्मीर पर उसका अधिकार नहीं बनता और वह उसे छल-बल से हासिल नहीं कर सकता इसीलिए अब उसे समझ नहीं आ रहा कि वह करे तो क्या करे? इसी बौखलाहट में वह कभी भारत को सबक सिखाने की धमकी दे रहा है तो कभी दुनिया को कोस रहा है। 

जम्मू-कश्मीर का भारत में पूर्ण एकीकरण और लद्दाख का केंद्रशासित प्रदेश बनना चीन के लिए भी बड़ा झटका है, क्योंकि वह भी पाकिस्तान की तरह कश्मीर और लद्दाख के इलाकों पर कब्जा जमाए है। साथ ही वह भारत के अब और तेजी से उभार को लेकर चिंतित है। फिलहाल वह भारत से सीधा टकराव भले न मोल ले, पर पाकिस्तान को भारत को जख्मी करने से रोकेगा, इसमें जरूर संदेह है।

वही दूसरी तरफ भारत ने अमेरिका के टैक्सस राज्य के ह्यूस्टन शहर में हुए ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में जहां भारत-अमेरिका संबंध को नई मजबूती दी। वहीं दुनिया को ग्लोबल पैमाने पर भारत की बढ़ती हैसियत का अहसास भी कराया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने पहली बार कोई सार्वजनिक मंच साझा करते हुए भारतीय मूल के 50 हजार से अधिक अमेरिकी नागरिकों को संबोधित किया। कहा जा रहा है कि हाउडी मोदी अमेरिका के इतिहास में पोप फ्रांसिस के बाद किसी विदेशी नेता का सबसे बड़ा कार्यक्रम था। संभवत: पहली बार किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी धरती पर किसी अन्य देश के शासनाध्यक्ष के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लेने की जरूरत महसूस की। ट्रंप ने ‘हाउडी मोदी’ के दौरान आतंकवाद को लेकर जो वक्तव्य दिए, उससे यह तो तय हो गया है कि कश्मीर मुद्दे पर भारत को अमेरिका का पूरा साथ मिलेगा और उसका यह रुख देखकर उसके कई मित्र देश भी अपना स्टैंड तय करेंगे। सचाई यह है कि आज अमेरिका को भी भारत की जरूरत है। भारतीय मूल के वोटर ट्रंप के लिए काफी महत्व रखते हैं, जबकि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं को काबू में रखने के लिए भी उन्हें भारत का सहयोग चाहिए। देखें, दोनों देशों की यह दोस्ती किस रूप में आगे बढ़ती है।

इसी क्रम में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर  ने न्यूयॉर्क में सांस्कृतिक संगठन ‘एशिया सोसाइटी’ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वहां उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि जब भारत ने अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को हटाने और जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित क्षेत्रों जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख में विभाजित करने का फैसला किया तब इस पर पाकिस्तान तथा चीन से प्रतिक्रिया आयी थी। पाकिस्तान ने भारत के साथ राजनयिक संबंधों को कम कर दिया था और भारतीय उच्चायुक्त को भी निष्कासित कर दिया था। चीन ने कश्मीर में स्थिति को लेकर इसे ‘‘गंभीर चिंता का विषय’’ बताया और कहा कि संबंधित पक्षों को संयम बरतना चाहिए और सावधानी से काम करना चाहिए खासकर ऐसी कार्रवाइयों से बचना चाहिए जो एकतरफा यथास्थिति को बदलता हो और तनाव को बढ़ाता हो।’’जयशंकर ने जोर देकर कहा कि भारत को पाकिस्तान से बातचीत करने में कोई समस्या नहीं है। उन्होंने कहा कि लेकिन हमें टेररिस्तान से बात करने में समस्या है और उन्हें सिर्फ पाकिस्तान बने रहना होगा, दूसरा नहीं। अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को हटाये जाने का भारत की बाह्य सीमाओं पर कोई असर नहीं पड़ा है। हमने इसमें अपनी मौजूदा सीमाओं में रहकर सुधार किया है। जाहिर तौर पर पाकिस्तान और चीन से प्रतिक्रियाएं आयीं। दोनों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग थीं। मुझे लगता है कि पाकिस्तान एक ऐसा देश है जिसने कश्मीर मुद्दे से निपटने के लिये वास्तव में समूचे आतंकवाद के उद्योग को रचा। मेरी राय में यह वाकई में कश्मीर से बहुत बड़ा मुद्दा है और मुझे लगता है कि उन्होंने इसे भारत के लिये निर्मित किया है। जम्मू कश्मीर से विशेष दर्जा समाप्त करने के भारत के फैसले के बाद पाकिस्तान को अब लगता है कि अगर यह नीति सफल हो जाती है तो 70 साल का उसका ‘‘निवेश’’ घाटे में पड़ जायेगा। इसलिए आज उनकी प्रतिक्रिया कई रूपों में गुस्से, निराशा के रूप में सामने आ रही है क्योंकि आपने लंबे समय से एक पूरा का पूरा आतंकवाद का उद्योग खड़ा किया है।’’

संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक महाधिवेशन में शामिल तो लगभग 200 के आसपास देश हुए लेकिन सबसे ज्यादा अगर कोई देश चर्चा में रहा तो वह भारत था। तारीफ करनी होगी हमारे प्रधानमंत्री की, हमारे विदेश मंत्री की, हमारे अधिकारियों की, जिन्होंने व्यापार, आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, नई वैश्विक चुनौतियों आदि पर तो दुनिया के समक्ष देश का पक्ष तो प्रभावी तरीके से रखा ही साथ ही उभरते भारत की शक्ति से दुनिया को रूबरू कराया। प्रधानमंत्री मोदी ने ह्यूस्टन की रैली और संयुक्त राष्ट्र के अपने संबोधन में पाकिस्तान की धज्जियाँ उड़ा दीं। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म किये जाने के बारे में पाकिस्तान की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए उसके चेहरे पर से नकाब हटाने में, पाकिस्तान को दुनिया भर में अलग-थलग करने में प्रधानमंत्री बेहद सफल रहे। प्रधानमंत्री मोदी का अमेरिका दौरा इस मायने में भी सफल रहा कि अब भारत की पहचान ऐसे देश की बन गयी है जिसकी राय अंतरराष्ट्रीय मामलों में बड़ी शक्तियों के लिए अहमियत रखती है, अब भारत की पहचान ऐसे देश की बन गयी है जिससे दुनिया के छोटे-बड़े देश आर्थिक और तकनीकी मदद की आस रख सकते हैं, अब भारत की पहचान ऐसे देश की बन गयी है जिसकी सफलता की कहानी हर कोई जानना चाहता है। अब भारत की पहचान ऐसे देश की बन गयी है जिसे कोई नाराज नहीं करना चाहता। अपनी इस यात्रा के दौरान भारत की सामाजिक योजनाओं की सफलता, तेजी से मजबूत होती अर्थव्यवस्था की जो तसवीर प्रधानमंत्री ने दुनिया को दिखायी है, यकीनन उससे भारत में निवेश बढ़ सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी के साथ गहन वार्ता के दौरान फारस की खाड़ी में शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने के लिए कूटनीति, वार्ता एवं भरोसा कायम किए जाने को प्राथमिकता देने के प्रति भारत का सहयोग दोहराया। मोदी और रुहानी ने ईरान और अमेरिका के बीच ताजा तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र के इतर मुलाकात की। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड की उनकी समकक्ष जेसिंडा आर्डर्न ने मुलाकात कर आतंकवाद से लड़ाई में एक दूसरे का समर्थन करते हुए पुलवामा तथा क्राइस्टचर्च आतंकी हमलों की कड़ी निंदा की। मोदी और आर्डर्न ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करते हुए राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, सुरक्षा तथा जनता के बीच संबंधों को मजबूत करने के कदमों पर चर्चा की। तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्मेनिया के अपने समकक्ष निकोल पाश्नियान और के साथ बैठक के अलावा भी कई द्विपक्षीय बैठकें कीं। मोदी ने अर्मेनिया के प्रधानमंत्री के साथ बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ाने पर जोर दिया।

उन्होंने अर्मेनिया में सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि प्रसंस्करण, फार्मास्यूटिकल्स, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में अवसर तलाशने की भारतीय कंपनियों की इच्छा को भी जाहिर किया। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के इतर जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल, कोलंबिया के राष्ट्रपति इवान मार्क्वेज और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमाद समेत कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। कतर के अमीर ने योग को वैश्विक स्तर पर और लोकप्रिय बनाने में मोदी के प्रयासों का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इसके अलावा इटली के प्रधानमंत्री ग्यूसेप कोंते, नाइजर के राष्ट्रपति मोहम्मदू इसूफू, नामीबिया के राष्ट्रपति हेज गिंगोब, मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह, भूटान के प्रधानमंत्री लोटे शेरिंग और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री मार्क रूट से भी मुलाकात की। मोदी ने यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक हेनरिटा फोर से भी मुलाकात की और भारत में बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण के संबंध में उनकी सरकार के उठाए कदमों को रेखांकित किया।

अंत में डॉ. रामकृष्ण सिंगी जी के चंद लाइनों से अपनी बात समाप्त करना चाहूंगा। 

कश्मीर घाटी में विकास का सूर्योदय होने वाला है।

क्योंकि 370 को मोदी ने दे दिया देश निकाला है।।

अब तक जिसे निहित स्वार्थियों ने बड़े प्यार से पाला है।

उसको अब संकल्पवान सरकार ने कूड़ेदान में डाला है।।

आशाओं के दीप जले हैं, नई दिवाली आई है। 

मोदी-शाह की दूरदृष्टि को सौ-सौ बार बधाई है।

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