चीन में ४ जून का वो तियानमेन चौक नरसंहार

कम्युनिस्टों द्वारा किए गए नरसंहार का इतिहास चीन में कम्युनिस्ट सरकार 1949 से अस्तित्व में हैं।  चीन में कम्युनिस्ट शासन की शुरुआत नरसंहारों से हुई थी।  1948-1951 यानि तीन सालों में 10,00,000 से भी ज्यादा …

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भगतसिंह की वीर माता विद्यावती कौर

पुण्य तिथि – 1 जून। इतिहास इस बात का साक्षी है कि देश, धर्म और समाज की सेवा में अपना जीवन अर्पण करने वालों के मन पर ऐसे संस्कार उनकी …

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तपस्वी राजमाता अहल्याबाई होल्कर

जन्म दिवस – 31 मई। भारत में जिन महिलाओं का जीवन आदर्श, वीरता, त्याग तथा देशभक्ति के लिए सदा याद किया जाता है, उनमें रानी अहल्याबाई होल्कर का नाम प्रमुख …

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सिख धर्म के पांचवें गुरु श्री अर्जुनदेव जी

बलिदान दिवस – 30 मई। हिन्दू धर्म और भारत की रक्षा के लिए यों तो अनेक वीरों एवं महान् आत्माओं ने अपने प्राण अर्पण किये हैं; पर उनमें भी सिख गुरुओं …

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स्वातंत्र्यवीर, वीर सावरकर जी के जीवन से जुड़ी कुछ बातें

भारत के अधिकांश लोग आज उस चहरे को भूल गए हैं जिनसे कभी अंग्रेज लोग थर-थर काँप उठते थे। जिन्होंने केवल भारत में ही नहीं, अंग्रेजो के गढ़ लंदन में …

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क्रान्तिकारियों के सिरमौर वीर सावरकर

विनायक दामोदर सावरकर का जन्म ग्राम भगूर (जिला नासिक, महाराष्ट्र) में 28 मई, 1883 को हुआ था। छात्र जीवन में इन पर लोकमान्य तिलक के समाचार पत्र ‘केसरी’ का बहुत …

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क्रान्तिकारी रासबिहारी बोस

25 मई/जन्म-दिवस। बीसवीं सदी के पूर्वार्द्ध में प्रत्येक देशवासी के मन में भारत माता की दासता की बेडि़याँ काटने की उत्कट अभिलाषा जोर मार रही थी। कुछ लोग शान्ति के मार्ग …

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आतंकवाद में दृढ़ चट्टान विश्वनाथ जी

24 मई/पुण्य-तिथि। अस्सी के दशक में जब पंजाब में आतंकवाद अपने चरम पर था, उन दिनों बड़ी संख्या में लोग पंजाब छोड़कर अन्य प्रान्तों में जा बसे थे। ऐसे में …

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Photo of Sheikh Abdullah and Jawaharlal Nehru during Congress committee meeting. Image Courtesy: Knowledge of India

जम्मू कश्मीर का भारत में विलय पूर्ण

मैं श्रीमान् … महाराजाधिराज श्री हरी सिंह जी … जम्मू व कश्मीर का शासक … रियासत पर अपनी संप्रभुता का निर्वाह करते हुए एतद्द्वारा अपने इस विलय के प्रपत्र का …

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क्यों भूले हम लाचित को!

जो देश अपने सपूतों को भूल जाता है उस देश के आत्मसम्मान को हीनता की दीमक चट कर जाता है। आक्रांताओं से लोहा लेकर देश की अस्मिता की रक्षा करने …

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सीमाओं के मायने

सदियों से बनती-बिगड़ती एवम् नया रूप लेती सीमाएँ गाथा है शौर्य की, बलिदान, त्याग, रणनीति एवम् वैचारिक दृढ़ता की। सीमाएँ गाथा इन मूल्यों के कमज़ोर पड़ने की भी है। अतिश्योक्ति …

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