Kargil युद्ध से जुड़े तथ्य

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आठ मई 1999 को पाकिस्तानी सेना और आतंकियों की घुसपैठ के बाद करगिल युद्ध की शुरुआत हुई थी. नियंत्रण रेखा के पास करगिल जिले के उस इलाके में घुसपैठ हुई, जो लद्दाख को जम्मू-कश्मीर के उत्तरी इलाके से अलग करता है. पाक सेना ने करगिल और द्रास की पहाड़ियों पर कब्जे की कोशिश की थी. एक नजर करगिल युद्ध से जुड़े हुए तथ्यों पर

आठ मई को कारगिल युद्ध शुरू होने के बाद 11 मई से भारतीय वायुसेना की टुकड़ी ने इंडियन आर्मी की मदद करना शुरू कर दिया था. युद्ध में वायुसेना के करीब 300 विमान उड़ान भरते थे. कारगिल की ऊंचाई समुद्र तल से 16000 से 18000 फीट ऊपर है. ऐसे में विमानों को करीब 20,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ना पड़ता था. ऐसी ऊंचाई पर हवा का घनत्व 30 फीसदी से कम होता है. इन हालात में पायलट का दम विमान के अंदर ही घुट सकता है.

करगिल युद्ध में तोपखाने (आर्टिलरी) से 2,50,000 गोले और रॉकेट दागे गए थे. 300 से ज्यादा तोपों, मोर्टार और रॉकेट लॉन्चरों ने रोज करीब 5,000 गोले फायर किए थे. लड़ाई के महत्वपूर्ण 17 दिनों में रोजाना हर आर्टिलरी बैटरी से औसतन एक मिनट में एक राउंड फायर किया गया था. दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह पहली ऐसी लड़ाई थी, जिसमें किसी एक देश ने दुश्मन देश की सेना पर इतनी ज्यादा बमबारी की थी.

भारतीय वायुसेना ने करगिल युद्ध में मिग-27 और मिग-29 लड़ाकू विमानों का प्रयोग किया था. मिग-27 की मदद से इस युद्ध में उन स्थानों पर बम गिराए गए, जहां पाक सैनिकों ने कब्जा जमा लिया था. इसके अलावा मिग-29 करगिल में बेहद अहम साबित हुआ. इस विमान से कई ठिकानों पर आर-77 मिसाइलें दागी गई थीं.

पाकिस्तान ने 1998 में परमाणु हथियारों का परीक्षण किया था. कई लोगों का कहना है कि कारगिल की लड़ाई उम्मीद से ज्यादा खतरनाक थी. हालात को देखते हुए मुशर्रफ ने परमाणु हथियार तक का इस्तेमाल करने की तैयारी कर ली थी. पाकिस्तानी सेना कारगिल युद्ध को 1998 से अंजाम देने की फिराक में थी. इस काम के लिए पाक सेना ने अपने 5000 जवानों को कारगिल पर चढ़ाई करने के लिए भेजा था.

कारगिल सेक्टर में लड़ाई शुरू होने से कुछ हफ्ते पहले जनरल परवेज मुशर्रफ ने एक हेलीकॉप्टर से नियंत्रण रेखा पार की थी और भारतीय भूभाग में करीब 11 किमी अंदर एक स्थान पर रात भी बिताई थी. मुशर्रफ के साथ 80 ब्रिगेड के तत्कालीन कमांडर ब्रिगेडियर मसूद असलम भी थे. एक रिपोर्ट के मुताबिक दोनों ने जिकरिया मुस्तकार नामक स्थान पर रात गुजारी थी.

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