Bhagwati Charan Vohra: भगवतीचरण वोहरा मां भारती के सच्चे सपूत

भगवती चरण वोहरा स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी थे। भगत सिंह तथा सुखदेव के साथ मिलकर उन्होंने अनेक क्रांतिकारी गतिविधियों में हिस्सा लिया था। वे “हिंदुस्तान प्रजातांत्रिक सोसाइटी पार्टी” के सक्रिय सदस्य भी बने। एक महान क्रांतिकारी होते हुए भी इन्हें कभी न गिरफ्तार किया जा सका ना ही फांसी दी जा सकी। इनकी मृत्यु बम परीक्षण के दौरान दुर्घटना में हुई थी।

भगवती चरण वोहरा का जन्म 4 जुलाई 1930 आगरा में हुआ था। पिता शिव चरण वोहरा रेलवे के अधिकारी थे।कुछ समय बाद पूरा परिवार आगरा से लाहौर आ गया। उन्होंने अपनी शिक्षा लाहौर में ही पूरी की जिसके बाद उनका कम उम्र में ही विवाह करा दिया गया। उनकी पत्नी भी उनके जैसे क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय रहने लगी।

लाहौर में अपनी शिक्षा दीक्षा के दौरान वोहरा ने रूसी क्रांतिकारियों से बहुत प्रेरणा ली जिसके पास उन्होंने एक अध्ययन मंडली का गठन किया। भारत माँ को अंग्रेजों की कैद से मुक्त कराना यह मुख्य प्रश्न केंद्रित रहता था।इसी दौरान उनकी मुलाकात भगत सिंह, सुखदेव से हुई। जिनके साथ मिलकर उन्होंने आगे चलकर नौजवान भारत सभा का गठन किया। पढ़ाई के दौरान 1921 में भगवती चरण में वोहरा ने गांधीजी के एक आह्वान पर पढ़ाई छोड़ दी,और असहयोग आंदोलन में पूर्ण रूप से सक्रिय हो गए।

आंदोलन के पश्चात वोहरा ने अपनी कॉलेज मैं बीए की पढ़ाई पूरी की। बाद में नौजवान भारत सभा के गठन और कार्यों को आगे बढ़ाया जिसमें उनके सेक्रेटरी भगत सिंह थे और खुद भगवती चरण प्रचार प्रमुख थे। भगत सिंह के बाद में वही संगठन के प्रमुख सिद्धांत कार थे प्रखर संगठन चालक वक्ता प्रसारक साहसी परिपूर्ण आदर्शवादी छवि यह सभी गुण श्री भगवती चरण वोहरा में कूट-कूट कर भरे थे।

जब भगत सिंह,सुखदेव,राजगुरु को गिरफ्तार करके जेल ले जाया जा रहा था। उस समय वोहरा तथा अन्य क्रांतिकारियों ने मिलकर योजना बनाई कि जब उनको लाहौर जेल से कोर्ट ले जाया जाएगा तो बीच में ही पुलिस पर धावा बोलकर उन सबको छुड़ा लिया जाए। लेकिन यह सभी प्रमुख क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल थे। इसलिए इनको काफी सुरक्षा में ले जाया जाता था। इसलिए उनको काफी बम बारूद की आवश्यकता थी और वोहरा को बम बनाने में महारत हासिल थी। पूरी योजना बन चुकी थी लेकिन उसके बाद भी भगवती चरण के मन में संदेह था कि कहीं बम अंत समय में धोखा ना दे जाए इसलिए उन्होंने बम परीक्षण का निर्णय किया। उन्होंने रावी नदी का तट परीक्षण के लिए चुना, परंतु दुर्भाग्य से उस परीक्षण में श्री भगवती चरण की मृत्यु हो गई।

भारत माता के वीर सपूत की मृत्यु की खबर जब चारों ओर फैली और इस बात का तथा जब आजाद को चला तो उन्होंने कहा कि लगता है “मेरा दाया हाथ कट गया है” और और भगत सिंह ने कहा कि “हमारे तुच्छ बलिदान उस श्रंखला की कड़ी मात्र होंगे”। ऐसे वीर शिरोमणी भगवती चरण वोहरा को नमन।

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