जानें, क्यों अंग्रेजों ने बिहारियों को सेना में भर्ती होने पर लगाई थी पाबंदी

जानें, क्यों अंग्रेजों ने बिहारियों को सेना में भर्ती होने पर लगाई थी पाबंदी

बिहार रेजिमेंट अपनी शौर्यता और पराक्रम के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इस रेजिमेंट ने हाल ही में चीन के सैनिकों को धूल चटा दी थी। जब चीनी सेना ने सीमा पर दुःसाहस करने की कोशिश की। इस दुःसाहस को नाकाम करने के लिए बिहार रेजिमेंट के जवान बिना हथियार के चीनी सेना पर टूट पड़े।

इससे घबराकर चीनी सेना सीमा छोड़ नौ दो ग्यारह हो गए थे। इस बात की पुष्टि चीन के आधिकारिक बयान से होती है, जिसमें चीन ने कहा कि चीनी सेना को भी क्षति हुई है। हालांकि, कितनी क्षति हुई। इस रहस्य से पर्दा नहीं उठाया गया, लेकिन ऐसी संभावना है कि बिहार रेजिमेंट के जवानों चीन के सैकड़ों सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया। बिहार रेजिमेंट के अदम्य साहस और शौर्य की गाथा सदियों पुरानी है।

इस रेजिमेंट ने अंग्रेजों के खिलाफ पहला विद्रोह सन 1857 में किया था। जब मंगल पांडेय की नेतृत्व में भारतीय वीर जवानों ने मोर्चा संभाला था। इस विद्रोह में बिहार रेजिमेंट के सैकड़ों सैनिक शामिल थे। उस समय बिहार रेजिमेंट के सैनिकों ने अंग्रेजों को दिन में तारे दिखा दिए थे।

इससे अंग्रेज काफी डर गए थे और उन्होंने बिहार रेजिमेंट के अट्ठारह यूनिट्स को तत्काल बर्खास्त कर दिय था। जबकि अंग्रेजों ने एक अधिसूचना जारी कर बिहारियों को सेना में भर्ती होने पर पाबंदी लगा थी। यह पाबंदी द्वितीय विश्व युद्ध के समय हटाई गई। जब अंग्रेजों को बिहारी सैनिकों की जरूरत आन पड़ी।

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