जानें, क्यों शाहजहांपुर को शहीदों का शहर कहा जाता है

जानें, क्यों शाहजहांपुर को शहीदों का शहर कहा जाता है

है प्रीत जहाँ की रीत सदा
मैं गीत वहाँ के गाता हूँ
भारत का रहने वाला हूँ
भारत की बात सुनाता हूँ

यह गाना सुनकर दिल भाव भिवोर हो जाता है। यह वही भारत है, जो एक समय अंग्रेजों के चुंगल में कैद था। उस समय देश में क्या दिन और क्या रात ? क्या होली और क्या दीवाली ? हर समय केवल मातम और मरहम ही था।

जीते हो किसीने देश तो क्या
हमने तो दिलों को जीता है
जहाँ राम अभी तक है नर में
नारी में अभी तक सीता है
इतने पावन हैं लोग जहाँ
मैं नित-नित शीश झुकाता हूँ
भारत का रहने वाला हूँ
भारत की बात सुनाता हूँ

यह पंक्ति वाकई में भारत की परिभाषा को दर्शाता है, लेकिन अंग्रेजों को शांति की भाषा समझ नहीं आती थी, बल्कि केवल और केवल क्रांति की भाषा समझ आती थी। तभी तो देश की रक्षा और सेवा के लिए एक के बाद एक क्रांतिकारी ने अपनी कुर्बानी दी। फिर चाहे कश्मीर हो या कन्याकुमारी, या फिर सिल्चर से पोरबंदर हो। सभी जगह पर एक ही गूंज थी।

अपनी आज़ादी को हम हरगिज भुला सकते नहीं
सर कटा सकते हैं, लेकिन सर झुका सकते नहीं

भारत मां के उन महान सपूतों को शत-शत नमन। हालांकि, आज जब हम आजाद भारत में अपना जीवन यापन व्यतीत कर रहे हैं, तो आने वाली युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणास्त्रोत स्तंभ जरूर स्थापित होना चाहिए, जिनसे युवा प्रेरित हो सके।

इतिहास में कई ऐसे शूरवीरों ने अपनी इतिहास खुद लिख डाली, जिस पर आज मैं प्रकाश डालने की कोशिश कर रहा हूं। इस विषय का प्रकाश केंद्र शाहजहांपुर है, जिसे शहीदों का शहर कहा जाता है। भारतीय आजादी में इस शहर का विशेष और अकल्पनीय योगदान रहा है। जहां एक नहीं, दो नहीं, बल्कि दर्जनों क्रांतिकारियों ने देश की सेवा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। इनका नाम आज सुनहरे अक्षर में लिखा जाता है।
भले ही आने वाली पीढ़ी इनको भूल जाए, लेकिन संपूर्ण विश्व इनकी वीरता का गुणगान करते नहीं थकते हैं। शाहजहांपुर के शहीदों का नाम क्रमशः रामप्रसाद बिस्मिल, अश्फाक़ुल्ला खान, रोशन सिंह, प्रेमकिशन खन्ना, बनवारी लाल, हरगोविंद, इंद्र भूषण, जगदीश और बनारसी हैं। आप सबको शत-शत नमन।
आप अमर थे
अमर हैं
और अमर रहेंगे
जय हिंद

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